तेरी चाहत की छुअन से कुछ और बन गई हूं मैंबरसो से तपती रेत थी,तुजसे मिली तो सागर सी बन गई हूं मैं|हेमांगी -
तेरी चाहत की छुअन से कुछ और बन गई हूं मैंबरसो से तपती रेत थी,तुजसे मिली तो सागर सी बन गई हूं मैं|हेमांगी
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