25 MAY 2020 AT 22:35

सोचा तो था
सोचा तो था की कभी लौट कर नहीं जाऐंगा उन गलीओ मे,
जहाँ इश्क का नाम दोस्ती के परदों के पीछे छीपा कर रखते है,
जहाँ हम दिल लेकर आते है,
और लोग उसे व्यापार समजते है,
उन बदनाम गलीओ मे लोग गिरते
संभलते है, तुटते बिखरते भी है,
फिर भी ,कितना भी सोचो,
लोग जाते तो वहीं गलीओ मे ही है.
हेमांगी

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