शक्ल दिखाने आये हो.
अब रहने दो,छोडो भी, जाने दो,
अब क्या जताने, दिखाने आये हो!
तेरी यादों को पहनकर केसे जिंदगी बसर करते है!
ये देखने आये हो या अपने आप को समजाने आये हो!
वक्त की कलम ने तुम्हारी और मेरी जिंदगी की कहांनि में और क्या गीत लिखे है!
वो गीत गुनगुनाने आये हो यां वो गीत के अलफाजों को ढूंढने आये हो.
तुमसे जुदा होकर भी तु मुझमें कहीं बसा है,
वो मुझमें बसे तुम को शायद मिलने आये हो.
हेमांगी
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11 JUN 2020 AT 7:40