8 JUL 2020 AT 21:47

रिश्तों की धूप छाँव.
जिंदगी मे लोग आते है, जाते है,
रिश्तों के मेले सजाते हैं,
बहुत कम ही ऐसे लोग होतें है,
जो दिल में बस जाते है,
वक्त की कसौटी पर कुछ ही रिश्ते खरें उतरते है,
कुछ तो बहते वक्त के साथ बह जाते है,
रिश्तों की धूप छाँव तो चलती रहती है,
जो रिश्ता विश्वास की बुनियाद पर बंधा होता है,
वो हर धूप छाँव से खुदबखुद उभर आता है.
हेमांगी

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