रात सोती क्यों नहीं
हम सब सोतें है यहां तक की ये रास्ते भी,
पर ये रात ना कभी नहीं सोती ,
ये रात एसी लगती है जेसे वो हमारें ख्वाबों की निगरानी करती हो,
हमारें मन के समूद्र में गोते लगाते ख्वाबो को पर देती है,
ये रात पुरानें इश़्क की गली में जा कर ठहरती है,
ये रात बाहें फेलाये हमें अपनी आगोश में ले कर नई दूनियां में ले जाती है,
ये रात ना थकती है,ना ठहरती है,और ना कभी सोती है.
हेमांगी-
25 MAY 2021 AT 22:17