5 JUN 2020 AT 21:34

रात मेरी जान
जब चांद तारों की बारात लिए मेरी खिडक़ी मे आता है,
मे निखरती हूं, सवरती हूं,
चांद आकर अपने होठों से जब रात का मांथा चूमता है,
आंखों मे बैठा सपना अंगडाई भरकर महकता है,
जेसे सोच के पैरों पर किसीने पायल बांधली हो जेसे,
में सोचती हूं की उम्र के कागज़ पर
तेरे इश्क़ की शाही बिखर गए हो जेसे,
धीरे धीरे रात आगे बढ़ती है,
जेसे आहिस्ता आहिस्ता अस्त होता सूर्य
लालीमा बिखर रहा हो जेसे,
रात संग चांद लिखते है अपने इश्क की कहांनि जेसे.
हेमांगी

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