रात ख़्वाब बूनती हैं.
रात ख़वाब बूनती है,
सपनों की एक चूनर सजाती है,
करवटो की सलवटों पर कुछ अरमान सुलगते है,
धीरे धीरे रात बढ़ती है और ख्वाहिशे जवां होने लगती है,
एक बूना हूआ ख्वाब एक और नया ख्वाब बूनने लगती है,
और रात क़रवट बदलकर बढती रहेती है.
हेमांगी-
22 NOV 2021 AT 23:00