27 JUN 2021 AT 21:35

रात के नाम एक खत.
प्रिय रात.
सुननां!में ना रोज़ तेरा ही इन्तज़ार करती हूं,
तु ना बढीया सी,मेरी अच्छीवाली दोस्त है,
दिन की भागदौड़ से थकी हूई मुज़े तु रोज़ अपनी गोद में सूलाती है,
जो मुकम्मल ना हो सके वो ख्वाबो से तु निंद में मिलवाती है,
जो कहीं कूछ छूटा है,तूटा है उस पर आँसू का मरहम लगाती है,
जो कभी मेरा होने वाला ही नहीं उस से खवाब में बाते करवाती है,
हर रोज़ सूकुन की निंद सूलाकर दूसरे दिन के लिये नई उम्मीद के साथ उठाती है,
हे रात तु सच में मेरी अच्छीवाली दोस्त है.
हेमांगी

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