10 NOV 2021 AT 22:52

रात के दामन में.
रात के दामन में अकसर ख्यालो की लो में जलते है,
कुछ अनकहीं कहांनि लिखा करते है,
जो बोल नहीं पाते दिन के उजालों में वो बाते रात के दामन में कहा करते है,
रात की चुनर को कुछ इस तरह ओढ़ ले ते है खूद पर,
की ख्वाबो को आँखो की दहेलिज़ पर आने को दिक्कत ना हो,
रात के दामन में तुम्हे छुपा लेते है कि कोई ना तुम्हें जान सके ना पहेचान सके,
ना तुम्हे किसी की नज़र से नज़र लगे.
हेमांगी

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