रात का रंग,
बढ रहा तेरी यादों के संग,
काली शाही बिखरी हो जेसे सतरंगी आसमान में,
उपर से ये तारों की चद्दर,
याद दिलाती हैं जेसे उडती हो तेरी चुनर,
खिडकी से उतरकर चांद कमरे में आ गया,
रात के अंधेरे को आगो़श मैं भर लिआ,
चांद भी जल रहा था,
मेरी बातों में जिक्र उसका ही हो रहा था,
रात जैसे जैसे बढ रही थी,
उसकीं याद और सुनहरी हो रही थी.
रात का ऐ रंग.
हेमांगी
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5 MAY 2020 AT 21:24