रात हमारे साथ क्युँ जागे.
हर वो ख्वाब जो दिन के उजा़ले में मुकम्मल न हो पाये उसे मिलनें को होती है ये रात,
अधूरें छूटे पीछे रह गये रिश्ते को जीने को होती है ये रात,
सोच के दरवजें पर दस्तक दे कर करवट़ की आगोश में सोती है ये रात,
तन्हाइ की चद्दर तलें ,आँसुओ की सेज पर सोती है ये रात,
सब कुछ बिखरा बिखरा सा है,फिर क्यो जागे हमारे साथ ये रात!
हेमांगी-
6 JUL 2021 AT 22:52