रात हमारे ख़्वाब कहाँ हैं
रात हमारे ख़्वाब कहाँ है!
ख़्वाबो में बसे ऐहसास कहाँ है!
बहोत ख़्वाबो की डोली सजाई थी
अब टूटे हूए हर एक ख़्वाब का नक्श कहाँ है!
यादो की सिलवटों में छुपाया था जो इश़्क ,
वो इश़्क की खूश्बुं कहाँ है!
जानती हूं तु बेवफा नहीं है,
पर तेरी वफा का मंज़र कहाँ है!
हेमांगी-
21 JUL 2022 AT 22:52