रात चुपके से आती है,
कानों में कुछ गुनगुना जाती है,
दिन के शोर में, जो दिल का,
शोर अनदेखा करते है,
रात को कमबख्त वो सोने नहीं देते है,
आंखें निंद कि आगो़श मे जाने को बेताब है,
दिल यादों के बारिश में भीगने को बेताब है,
दिल,आंखें, यादों कि कशमकश चलती रहती है,
रात चुपके से कानों में कुछ गुनगुना लेती है.
हेमांगी-
22 APR 2020 AT 0:57