19 MAY 2020 AT 21:52

राख को मत कुरेदिऐ,
राख के सिने मे दफन है कुछ राज़,
राख के अंदर आज भी सुलगती है आग,
बहुत तकलीफ हुई जब जला वो लम्हा,
जिस मे कैद था वो राज़,
छटपटाया , तिलमिलाया बहुत दर्द हुआ उस दिल को जिस दिल के कोने मे कुछ टूटा था,
जुठे वादों कि गठरी नीचे सच्चे रिश्ते दबे हुए थे,
राख को खाख रहने दो,
राख को मत कुरेदा करो.
हेमांगी

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