प्रिय तन्हाई.
सब कहते है की मैं अकेला हूं,
या मैं अकेली हूं, ये तो गलत बात है,
अकेला कोइ नहीं होता,
उसका साथ देने के लिए हर बार तन्हाई तो होती है,
ऐ तन्हाई तुना गज़ब की जादूगरनी है,
इन्सान के अंदर की सारी बातें बहार निकाल देती है,
कभी कभी तो तु डाक्टर बन जाती है,
इन्सान के अंदर का बोझ आंँसुओं के साथ बहा लाती है,
ए तन्हाई तुना बहुत ही कमाल की है,
इन्सान जो ये जिंदगी के मेले मे खो रहा है उसे तु खूद से ही रूबरू करवाती है.
हेमांगी-
19 JUL 2020 AT 17:21