प्रिय सुकून.
क्या तुम एक वक्त के लिए कहीं ठहर नहीं सकते!
बार बार यहां वहां भटकते क्यूँ हो!
तुम्हारा ठीकाना तो सबके भीतर है,
फिर क्यूँ तुम्हें लोग बहार ढूंढा करते है?
दिल के कमरे में शांति से बैठा करो,
अपने होने की खूशबू से हर जगह को महेका करो,
लोगों की जिंदगी को सूकुन से भर दो.
हेमांगी-
14 JUL 2020 AT 16:22