प्रेम कभी मरता नहीं,
बस धीरे धीरे मुरझा सा जाता है,
उस फूल की तरह जो कभी किसी के माथे पर सजा था,
बहोत सी परतो के नीचे शायद दब सा जाता है,
प्रेम शुरू तो होता है दिल से,
पर जा कर अटकता है देह पर,
शायद इसी वजह से वो मुरझाने लगता है,
कहीं गुम होने लगता है.
हेमांगी
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28 MAR 2022 AT 16:34