7 JUL 2020 AT 7:38

फिर एक और दिन ढल गया,
सब सामान समेट ने लगे हम
कहीं कुछ अरमान बिखरे पडे थे
तो कहीं कुछ यादे धुंधली सी दिख रही थी
फिर वो" रात " के आगोश में "निंद" चली गई
शायद वो बिखरे हुए अरमान, धुंधली सी यादे
ख्वाबो में जा के पूरी होगी
हेमांगी

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