15 JUL 2020 AT 23:22

पहचान में नही आता.
पहचान में नही आता वो शख्स जो कल तक मासूम था,
लबों पे जहां मुस्कुराहट बसी रहती थी,
आंखों में अलग सी चमक देखने को मिलती थी,
बिन बात जो गुनगुनाता रहता था,
आज जिन्मेंदारी के बोझ का मारा फिरता है,
पहचान में नही आता है.
हेमांगी

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