3 JUN 2021 AT 16:55

ओ आलस...
तुम ना शुरुआती दीनोमें ना बहोत ही प्यारे लगते हो,
दूनियां भर का सुकून मिलता है तेरी पनाह में,
कभी कभी ना तुमनां मुझे सहेद से मीठे लगते हो
तो कभी कभी फिज़ाओ सी ठंन्ड़ लगती है तुमसे लिपटे ही,
पर धीरे धीरे अब मेरा वो वहेम दूर हो रहा है जब से मेरे जिस्म में ऐक साथ बहूत बिमारीयों ने दस्तक देना शुरु कर दीया तब से,
जब जब अपनें आप को आईनें में देखती हूं तब तब ये सोचती हूं की तु कितनी हसीन लग रही थी जब में तेरी पनाह में सुकून की साँस लेती थी तब.
हेमांगी

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