8 OCT 2022 AT 10:40

नज़्मो सी बाते तुम्हारी,
मैं इश़्क सी गज़ल बनुं,
ना तुम मुजमें बसो,
ना मैं कहीं ठहर सकुं,
इश़्क मैंने पाक सा कीया,
ना तुम मिल सके,
ना हम कहीं बस सके.
हेमांगी

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