नज़्मो सी बाते तुम्हारी,
मैं इश़्क सी गज़ल बनुं,
ना तुम मुजमें बसो,
ना मैं कहीं ठहर सकुं,
इश़्क मैं ने पाक़ सा कीया,
ना तुम मिल सके,
ना हम कहीं बस सके.
हेमांगी-
5 OCT 2021 AT 21:35
नज़्मो सी बाते तुम्हारी,
मैं इश़्क सी गज़ल बनुं,
ना तुम मुजमें बसो,
ना मैं कहीं ठहर सकुं,
इश़्क मैं ने पाक़ सा कीया,
ना तुम मिल सके,
ना हम कहीं बस सके.
हेमांगी-