नाराजगी की ड़ोर से दोनों ही बंधे थे,
उस पर अहम की चद्द भी दोनों ने तान रख्खी थी,
वक्त अपनां काम कर रहां था,
और दोनों वहीं पर ही ठ़हरे थे बस दोनों की आश कहीं खो सी गई थी,
धीरे धीरे अरमानों नें भी पर सिमट़ लीये,
और उम्मीद नेें भी घर वापसी कर ली,
बस एक युध्ध ही था जो एक दूजे के मन से निकल नहीं रहा था,
आखिर गलती कहां हूई!
इस सवाल को दिल में बिठाए दोनों अलग रास्तो पर मूड़ गए,
शायद फिर कभी ना मिलनें के लिये.
हेमांगी-
23 MAY 2021 AT 17:10