29 MAY 2020 AT 10:19

ना रुठता है,
ना चिल्लाता है,
ना ही पीद्दी सा मुह करके कोने मे छीप जाता है,
यकीनन मेरा दोस्त मुझसे बेइंतहा मुहब्बत करता है.

जब उदास होती हु मैं,
अपनी बांहें फेलाके अपने आप मे छीपा लेता है,
यादों के पन्नों को पलट कर के गुदगुदा लेता है,
यकीनन मेरा दोस्त मुझसे बेइंतहा मुहब्बत करता है.

कितना भी चिल्लाती हूँ,
नोचती हूँ, सिकुड़ देती हूँ,
कभी भी मुझे पलट कर जवाब नहीं देता है,
यकीनन मेरा दोस्त मुझसे बेइंतहा महोब्बत करता है.

क्या हुआ?
किस सोच में पडे हो तुम!
वो दोस्त कोन है जानते हो तुम!
सुनेहरी कलम ओर यादों की पन्नों की डायरी हो तुम,
मेरे दोस्त के रुप में किताब हो तुम.

ना बोलती है,
जब कश्मकश होती है तो जवाब बनती है,
मेरी सोच की आइना बनती है,
यकीनन मेरी दोस्त मुझसे बेइंतहा महोब्बत करती है.
हेमांगी

-