मुझको मेरी कमी खलती है.
आज बहोत बरसो के बाद तस्ललि से आईने से रूबरू हुई,
बहोत बरसो की सलवट्टो ने चहेरे की लकीर को ही बदल दीया था,
और शायद दिल की भी सलवटे इश़्क की बूंद को तरस रही है,
शायद दिल के इस आईने को मिले बरसो हो ही गये थे,
मुझको मेरी कमी अब खलने लगी है,
सब से इश़्क करते करते शायद खूद से किनारा करने लगी थी,
पर अब इश़्क की बारीश में फिर से भीगना है,
अब एक सिद्दत वाला इश़्क खूद से करनां है.
हेमांगी— % &-
17 FEB 2022 AT 12:53