मुझे पसंद है,
मै नहीं सजती सवरती किसी और के लिए ,
मुझे पसंद है,
खूद को खूद की नज़र से देखनां,
संवरना,सजनां, शरमांजानां,
ये हवांओ से जब बात ये लट करती है,
मैं मदहोश हो जाती हूं उसे देख कर,
और सोचनें लगती हूं उस उपरवाले की कारीगरी पर,
जब ये दुपट्टा सरक जाता है,कंधो से और बाते क
रनें लगता है इन हवांओ से,
कुछ सुकून सा महेसूस होने लगता है,
और ये निगाहें!
उफ्!जब काज़ल चुमता है इन निगाहों को,
होश में होकर भी बेहोश हो जाती हूं,
मुझे पसंद है सजनां,सवंरना और
कुछ कुछ खूद से भी इश़्क करनां.
हेमांगी-
23 SEP 2022 AT 17:50