मेरे पास छ़ोड जाओ.
याद है तुम्हें एक बरसाती शाम में जब तुम मुझे मिले थे,
दिल में प्यार और आंखों में आशा लिए खडे थे,
मेरे पास छोड़ जाओ वो आशा वाली शाम जिसमें तुम मुझे मिले थे.
वो भी दिन याद करो जब एक ही कूल्ड से हमने चाई पी थी,
तु कूल्ड से पी रही थी और मे निगाहों से,
ऐसा करो मेरे पास छोड़ जाओ वो आधी मुलाकात जो चाई से शुरू तो हूई पर कहीं आधे रास्ते में ही कहीं खो गई.
मेरे पास छोड़ जाओ वो हर एक पल जिसमें "मैं" मैं नहीं "तुम" तुम ना रहकर "हम" बने थे.
वो हर लम्हा जो वक्त की कैद मे से हमने चुराकर जी लीया था.
हेमांगी
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24 JUN 2020 AT 14:39