मेरे अंदर.
शोर है, आक्रोश है, अपनों ने छन्नी किया हुआ मासूम बच्चे सा दिल है.
तडप है, कशिश है, अपनों ने काटीं हुई ख्वाहिशों के पर की चुभन है.
मेरे बाहर.
शांत, गंभीर चहेरा है. जो अपने अंदर की परिस्थितियों से गहरा है.
हसता है, बोलता है, पर कहीं कहीं अपनेआप को खो रहा है.
हेमांगी-
28 JUN 2020 AT 17:46