21 JUL 2020 AT 8:32

मेरा यकीन करो.
ना तुम गलत थे, ना मैं गलत थी,
हमारी सोच के दायरों की बात ही अलग थी,
वो वक्त सायद सही नहीं था,
या हमारा नजरिया गलत था,
तुम "तुम" तक ही सिमित रहे,
ओर मैं "मैं" के दायरों से बंधी रही,
लम्हों में जिना चाहते थे,
पर हम कल मे से बहार निकल ही नहीं पाये,
मेरा यकीन करो हर कुछ बदना चाहां हमने,
बस खूदको ही नहीं बदल सकें एक दूजे के लिए.
हेमांगी

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