मेरा ऐक काम कर दो
अपने वक्त की रस्सी से बंधी हुई मुझे आजाद कर दो,
कल ओर आज के झूले पे बैठी मे अब थक सी गई हूं,
तेरा इश्क ना अपने आप मे समाता है ना ही आजाद करता है,
मे हर शाम अपने आंगन में तेरा इन्तजार करती हूं,
अब वो झूला भी हजार सवाल करता है,
उसकी किचुक सी आवाज़ में वो बातें बोलती है,
जिसका वो साक्षी है,
मेरा बस ऐक काम कर दो,
मुझे हर वो बात से आजाद कर दो जो तुमसे जूडी है.
हेमांगी-
6 JUN 2020 AT 16:49