16 AUG 2021 AT 9:49

में सिर्फ अल्फाज़ नहीं लिखती,
मेरे जज़्बात निचोड़कर के सुला देती हूं पन्नो पर,
बेजान से पन्ने फिर तिलमिला उठते है,
दिल की चुभन को सजाना सवारना पडता है ,
तब जाकर उन्ह मे जान बस जाती है ,
जो हर दिल की जान बन जाती है ।
हेमांगी

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