में नज़्म सी बिखरती रहेती हूं काग़ज पर,और तु हे की मुजे गज़लो में बांध कर कागज़ पर सुलाना चाहते हो!हेमांगी -
में नज़्म सी बिखरती रहेती हूं काग़ज पर,और तु हे की मुजे गज़लो में बांध कर कागज़ पर सुलाना चाहते हो!हेमांगी
-