26 AUG 2021 AT 17:41

मैंने इश़्क को पन्नों पर सुलाया है,
उस अन्ज़ानी नज़रो से बचाया है जो इश़्क को इश़्क की नज़र से नहीं देखते,
कभी थकती हूं, टूटती हूं, बिख़र भी जाती हूं,
तब संभालकर तेरा इश़्क पढ़ लेती हूं,
दिल को तस्ल्ली हो जाती है कि तुम मेरे पास ही हो.
हेमांगी

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