13 SEP 2021 AT 16:12

मैं ने तेरे इश़्क को दुपट्टे सा अपनें सिर पर पहन लिया है,
अब चाहे नाराजगी की बारिश हो या विद्रोह की अग्नी,
तुम हर कदम मेरे पास ही रहोगे,
बन कर मेरे इश़्क की छांव.
हेमांगी

-