मैं क्युं मायुस हो जाउँ!
क्युं झूठी तसल्ली रखके गीरगीडाउँ,!
ना कभी मैंने तुझे पाया है,
ना कभी तुम्हें पाने की तमन्ना की है,
ना कभी तुम्हें खो दूंगी ऐसा डर रखा है !
तुम मुझ में शामिल हो जैसे एक मोती सागर मैं हो.
बहोत कुछ तुम सा , है मुझमें।
हेमांगी-
11 OCT 2022 AT 22:13