30 MAY 2022 AT 23:49

मैं खो जाना चाहती हूं
कभी कभी लगता है खो जाना अच्छा है,
उन वक्त में,उन लम्हों में खो जाना है जहां हम चाहकर भी नहीं जा सकते,
उन पुरानी यादों की नगरी में खो जाना है जहां हम खूद को छोड़ आये है,
हमारा भोलापन, हमारी नादानियां,
वो अल्ड्डपन सब याद आता है,
साथ में हज़ार सवाल भी लाता है,
क्यूं उन गलीयों से नाता टूट गयां!
क्यूं बचपन हाथ से फिसल गया!
उन आधे अधूरे खेल को खेलनां चाहती हूं,
मैं खो जाना चाहती हूं.
हेमांगी

-