2 FEB 2022 AT 21:55

मैं इश़्क हूं,
कोई गणित नहीं,
जो तुम मुझे समज नही पा रहे हो,
क्या सच में मैं इतनी कठीन हूं जो मेरे भीतर बसा इश़्क का रंग तुम तक पहोंच नही पा रहा,
तुजे रंग नही पा रहा,!
मैं ने रंगो से भी खेलना कब से बंध कर दीया,
क्यूंकी तेरे इश़्क का रंग जो इस दिल पर छाया है उसे अब कोई नही निकाल सकता,
और ना ही कोई और रंग अपना असर कर सकता है.
हेमांगी— % &

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