22 SEP 2021 AT 22:05

कुछ विचार उस धूंए से है जो बार बार मन कें आंगन में बेवज्ह उठते रहते है,
फिर किसी कोनें में किसी गुच्छे के भाती यहां वहां उड़ते रहते है,
वहोत रोकना चाहती हूं पर फिर भी वो किसी बिनलगाम सी घोडी से दोडते रहते है,
फिर अचानक वास्तविकता का सूरज उगता है और उसकी रोशनी पडते ही वो सब कहीं खो जाते है|
हेमांगी

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