कुछ तो साजिश रही होगी उन निगाहों की,हर बार दिल ही गुस्ताखी करें वो जरूरी तो नहीं.हेमांगी -
कुछ तो साजिश रही होगी उन निगाहों की,हर बार दिल ही गुस्ताखी करें वो जरूरी तो नहीं.हेमांगी
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