29 MAY 2020 AT 7:46

कुछ राज़,राज़ ही रहे तो अच्छा,
दिल के कोनो मे दफन रहे तो हि अच्छा,
कुछ राज़ खुलते ही,
रीश्ते करवट बदल देते है,
अपने पराये और पराये अपने बन जाते है,
कही तूफा तो कही धूआं सा उठता है,
किसीके तकिये के नीचे ,
अरमानो का तालाब भर जाता है,
कुछ राज़,राज़ ही रहे तो अच्छा,
हेमांगी

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