कुछ ख़याल टेढे मेढे रास्तों जेसे लगते है,
उन ख़यालो का क्या किया जाय!
जो सही भी नहीं ओर गलत भी नही,
सही ओर गलत के बिच में जूलस्ते खयालो के पुल पर में खड़ी हो कर वक्त के दायरे में खूदको ही कैद कर दीया जाय!
ना ही कोई ड़गर है,ओर ना ही कोई मंजिल,
फिर भी इन खयालो से निजा़त किस कद्र पाया जाय!
हेमांगी-
8 JUL 2021 AT 17:37