12 MAY 2020 AT 8:27

कमी कहां रह जाती है
हर रिश्तों में जान डाल देती है,
अपने सपनों को भूलकर दूसरों की खवाहिश पूरी करती है,
सूरज की किरणों के संग जगती है,
पूरे दिन सबके सपनों के पीछे भागती है,
ना थकतीं है, ना झुकती है,
सबके सो जाने के बाद सोती है,
सब कुछ करती है,
फिर भी कमी कहां रह जाती है.
हेमांगी

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