20 MAY 2020 AT 14:49

कितनी परछाइयां उभरती है
मन के केनवास पर कितनी परछाइयां उभरती है, मिटती है,
पुरानी यादों की मीट्टी को महकाती है,
ऐक खास खूशबू के नशे में मदहोश हो के
पीछे छोड़ आइ गलीओ मे घूम आतें है,
कुछ परछाइयां वक्त के साथ धुंधली हो जाती है,
और कुछ मन के केनवास पर अपनी निशानी छोड़ जाती है.
हेमांगी

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