30 DEC 2021 AT 22:53

कितना कुछ अनकहां रह गया.
बहोत सी बाते थी,
बहोत सी मुलाकाते भी हूई थी तुम्हारे मेरे दरमियां,
बहोत कुछ कहा था ,बहोत कुछ सुना था,
फिर भी कितना कुछ अनकहा रह गया तेरे मेरे दरमियां,
इंन्जार की आदत नही थी कभी मुझे,
पर अब इंन्जार ही जिंदगी बन गई है ,
मौंसम बदला,दिन भी बदला,
पर वक्त की कैद में कैद हुआ लम्हां फिर आया हि नही.
हेमांगी

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