किसी की बेरुखी से तंग आकर.
किसी की बेरुखी से तंग आकर मैं ने अपनें ख्वाबो की चद्दर को सिमट लीया,
अब ना कोई शिकवा है, ना ही कोई शिकायत,
बस खूद की खूद से हो रही एक जंग है,
उस इन्सान को क्या तवज्जो दे,
जो हवा के साथ अपनां रुख बदल कर चला गया,!
जो जिंदगी की सड़क पर बिच रास्ते में हाथ छोड़कर चला गया!
हेमांगी-
30 OCT 2021 AT 13:16