21 JUL 2020 AT 16:53

किस बात की सज़ा है ये.
किस बात की सज़ा है ये जो तुम मुझे आधें रास्ते में ही छोड़ कर चल दिऐ,
वो वक्त फिर लौटकर आया ही नहीं जिसे लम्हों की अलमारी में कैद कर रख्खा था,
तेरे इश्क़ की चाशनी में हम ऐसे डूबे की
ना उभर सके ओर ना संभल सके,
तुजे पाना जिद्द नहीं मेरी ,
वो तो तेरे इश्क़ का नशा छा रहा था मुझ पर,
तुजसे इश्क़ करने की सजा तुने दी है की
तुजे अपनी जिंदगी मान लेने की सजा है ये!
हेमांगी

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