ख्वाहिशो की कस्ती में मेरे अरमानों की डोली सजी थी,कमबख्त हकीकत की रोशनी में आँखे भर आई.हेमांगी -
ख्वाहिशो की कस्ती में मेरे अरमानों की डोली सजी थी,कमबख्त हकीकत की रोशनी में आँखे भर आई.हेमांगी
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