कहां किसीको मुकम्मल जहां मिला है.
कभी कुछ आधा तो कभी तूटा अरमान खिला है,
कुछ साजिश तो रही है उस वक्त की,
जो पूरा करने अपने अधूरे अरमान खूद भगवान ने भी बार बार जन्म लिया है.
हेमांगी-
1 JUL 2020 AT 9:44
कहां किसीको मुकम्मल जहां मिला है.
कभी कुछ आधा तो कभी तूटा अरमान खिला है,
कुछ साजिश तो रही है उस वक्त की,
जो पूरा करने अपने अधूरे अरमान खूद भगवान ने भी बार बार जन्म लिया है.
हेमांगी-