25 FEB 2022 AT 14:54

खालिपन.
कभी कभी सब कुछ होता है,
पैसा,दौलत,शौहरत,
फिर भी क्यूं कुछ अधूरा अधूरा सा लगता है,!
मन के किसी कौने में क्यूं मायूसी सी छा जाती है!
कुछ तो होता है!
पर क्या!वो समज नहीं आता,
शायद एक खालिपन सा होता है,
सब रिशतो के बिच में भी अकेलापन लगता है,
वो खालिपन धीरे धीरे बढनें लगता है तब शून्यवकाश फैल जाता है,
मन धीरे धीरे डूबनें लगता है.
कभी कभी लगता है सब ब्लेकहोल जेसा,
खो रहे है,मिल रहे है,
पर कहां जाना है वो तैय नहीं कर पा रहे,
दूर दूर तक सन्नाटा है,
ना कोई आता है नाही कोई जाता,
खूद ही खूद में डूब रहे है,
हेमांगी

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