कभी कभी लगता है की ये त्यौहार औरतो की काबिलियत के इम्तिहान पत्र है,
त्यौहार के दिन औरते कुछ अलग सलीके से सजती सवंरती है,
हलदी और मिरची से अपनां सिंगार करती है,
थकान तो होती है पर मुस्कान का सिंगार अपनो को सुकून दे देता है,
दबे दबे होठों के बिच में कुछ शिकायतो का मेला जमा तो हुआ है,
पर वहां पर से बहार आना नामुमकिन सा लगता है,
पसीने में नहाकर अपनी काबेलियत का इम्तिहान देती है,
अक्सर अच्छी लगी मिठाई की खूशबू को सिर्फ वो चख पाती है,
शाम को थकी हारी अपने बिस्तर संग कुछ न कुछ बतियाती है,
सच में ये त्यौहार औरतो के इम्तिहान पत्र होते है.
हेमांगी-
31 MAR 2022 AT 9:54